रावण के लंका में प्रतिबन्ध तो राम के अयोध्या में क्यों नहीं ?

रावण के लंका में प्रतिबन्ध तो राम के अयोध्या में क्यों नहीं ?

मुबई : शिवसेना अपने मुखपत्र सामना में छपे लेख के माध्यम से प्रधानमंत्री से माग किया हैकि  हिन्दुस्तान में भी बुर्का पर प्रतिबन्ध लगे. जबकि देश के सुरक्षा की दृष्टि से दुनिया के कई देशों में बुरका पर प्रतिबन्ध लग चुका है तो भारत पीछे क्यों ? महिलाओं के बुर्का पहनने पर जहां शिवसेना की पहल के बाद बहस शुरू हो गई है वहीं दूसरी तरफ इस मांग का विरोध होना भी तय माना जा रहा है। इसका विरोध करने वाले शिवेसेना की मांग को कट्टरवादी सोच और सियासी फायदा करार दे सकते हैं, लेकिन इसके बाद भी यह सवाल काफी बड़ा है, जिसका जवाब तलाशना भी बेहद जरूरी है। जहां तक शिवसेना की बात है तो वह इससे पहले भी इस तरह की मांग कर चुकी है। लेकिन अब इसकी शुरुआत श्रीलंका से हुई है। दरअसल, श्रीलंका में आतंकी हमले के बाद वहां की सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बाद ही शिवसेना ने भारत में इसको बैन करने की मांग की है। इतना ही नहीं दुनिया के कई देश जिसमें यूरोपीय देश ज्‍यादा है ने बुर्का प्रतिबंधित किया हुआ है।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से भाजपा उमीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ने शिवसेना की माग को जायज ठहराया है. वही रिपब्लिकन पार्टी के अध्यक्ष रामदास आठवले ने शिवसेना की माग कों गलत कहा है. व्यक्ति के अधिकार है कि अपने धर्मं और परमपरा के अनुरूप वस्त्र पहन सकता है सभी बुर्के पहनने वाले आतंकवादी नहीं होते